Aug 6, 2024

पैसा भी कैसे बन जाये कमाउ पूत

भारत युवाओं का देश, जहां की 65 फीसदी आबादी 35 साल के नीचे की है। इस युवा देश की नई पीढी खुली और तेजी से बढती अर्थव्यवस्था के साथ जवान हुई है। इसी माहौल में पला-बढ़ा हमारा नया निवेशक भी देश की अर्थव्यवस्था में भागीदारी करता है। पर ज्यादातर कामयाब नहीं हो पाता। कारण वित्तीय जानकारी या साक्षरता का अभाव। सब कुछ बदल चुका है या बदलाव पर है। सोच से लेकर दिनचर्या, नियामक से लेकर नियम, निवेश से लेकर उसके तरीके तक। लेकिन जो नहीं बदला वो है निवेश को लेकर हमारी सोच, जिसका कारण है वित्तीय जानकारी या साक्षरता का अभाव और तिरस्कार दोनों। वैसे आज संचार के हर माध्यम से जानकारी बढाने की दिशा में काफी प्रयास हो रहे हैं। पर अफसोस! अधिकतर कैप्सूल कोर्स हैं, जिनके लिए फंडामेटल जरूरी हैं। आप बिजनेसमैन बनना चाहते हो या डॉक्टर, सीए, आईएएस या कुछ भी। मूल जानकारियां जरूरी है। प्रोफेशन में सेट हो जाने के बाद भी जानकारी से लबरेज रहना होता है। लेकिन कितना भी अनुभवी पायलट हो, पहले ट्रेनिंग फिर ट्रैफिक कंट्रोलर की जरूरत से इनकार नहीं कर सकता है। अच्छा बताइये। सोने के अभी के दाम क्या कभी घटेंगे? 

पेट्रोल के भाव या लोन ब्याज दर कभी कम होगी? जनाब! जब इन सभी बाजार संचालित उत्पादों का दाम कम नहीं होगा तो उद्गम स्थली, यानी बाजार क्यों कर धोखा दे जाता है। कभी सोचा कि शेयर बाजार में आप मात क्यों खा जाते हैं? साइकिल चलाना आपको आता नहीं है, आप सीखते है। 1+1=2 होता है, आपने सीखा है आप जानते नहीं थे। पैसा कमाना आपने सीखा है या आप जानते थे? याद कीजिये। दरअसल ये सब जिसमें आज आप पारंगत है, उसे आपने शुरुआत मे मार्गदर्शक के सहारे से सीखा, जाना या किया था। उच्च शिक्षा प्राप्त अभिभावक भी बच्चों को पढाते हैं स्कूल/गुरू की छत्र-छाया में।

इसी तरह स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार भी निवेश में मार्गदर्शक होते हैं, जो एक निश्चित फीस पर आपके लिए काम करते हैं। ध्यान दें यहां बात स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार की हो रही है, न कि कमीशन एजेंटो की। और, लाख टके की बात। जनाब! ये है कि हम इंसान तीन चीजें पैदा करते है – औलाद, अनाज और पैसा। पहले दो, औलाद और अनाज को तो अपना मानते हैं। किसान सेहतमंद फसल के लिए कितना खटता है। बोरिंग लगाओ, कुआं खोदो, खाद डालो। अरे बेटा, तबीयत खराब हो गई, चलो डॉक्टर पास। सही तालीम पाकर बच्चा आपका नाम रौशन करे, इसके लिए अच्छे स्कूल से लेकर ट्यूशन, इंस्टीटूशन्स की गूगली सर्च मारते हैं। पर वहीं जब बात पैसे की आती है तो सौतेला व्यवहार – गया! जाने दो। कभी पुचकार कर हाल जानते तो जवाब आता – ये स्कूल अच्छा नहीं है। और तो और कभी पूछिए – कितने दिन के लिए पैसा लगाना है तो आम जवाब 6 महीने-साल भर। मेरे सरकार! जवाब दीजिए। नहीं तो सोचिएगा जरूर कि जब आपका दो साल का बच्चा आपको चाय बनाकर नहीं पिला सकता तो अपने नवजात फंड/स्टॉक से ऐसी नाजायज मांग क्यों?

दूसरे, एफडी या डाक बचत को 5 साल, फिर शेयर या म्यूचुअल फंड के साथ इतनी नाइंसाफी, क्यों? तीसरे, जब आपको खुद 40-50 हजार की सैलरी पाने में 25 से 35 साल लग गए तो क्या थोडा-सा वक्‍त आपका ये ’बच्चा’ भी लेगा कि नही? तो पहले पढाई (संचय) कराए कि पैसा सीए बने न कि मजदूर, जहां दिहाड़ी एक दिन, फांके चार रोज होते हैं। क्या आप जानते हैं, कि पिछले 25 सालों में शेयर बाजार 100 गुना बढ़ा है, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में सिर्फ 6 से 10 गुना वृद्धि हुई है। क्या आप जानते कि 30 साल के व्यक्ति का 20 लाख का बीमा महज सालाना के 4-6 हजार में हो जाता, जबकि यूलिप में 1,33,333 (SAMF 15) रुपए में होता है। एक हजार की मासिक सिप जो 2 मार्च 2000 से 2 फरवरी 2005 तक चली, उसमे कुल जमा 60 हजार पर रिटर्न आता 259% यानी 2,15,256 रुपए। लेकिन एक कुशल सलाहकार ने मॉनिटरिंग करते हुए बाजार के हर डिस्काउंट सीजन (जिसे लोग डाउन मार्केट बोलते है) पर पांच हजार के गुणकों में 3 बार यानि 15 हजार रुपए का अतिरिक्त निवेश कराके रिटर्न को 343% यानि 2,80,817 रुपए का लाभ दिलाया, जो 25% के विशेष निवेश पर 84% अतिरिक्त है। इसे कहते वित्तीय प्रबंधन जिसका मूल उद्देश्य कम से कम निवेश कराके अधिकतम रिटर्न की प्राप्ति है।

 यहां डिस्काउंट सीजन की पहचान की गई, जिसे उस समय निवेशक से बेहतर उसका सलाहकार जानता था। और, संगत का असर का रंग ये रहा कि वो निवेशक आज स्टॉक मार्केट विशेषज्ञ है, उसी सलाहकार के साथ! वित्तीय सलाहकार शेयर से लेकर म्यूचुअल फंड, सरकारी-प्राइवेट फिक्स्ड डिपॉजिट से लेकर डाक-बचत स्कीम की जानकारी रखते है, जिसे आपका रिस्क प्रोफाइल जानने के बाद प्रस्तावित और व्यवस्थित करते हैं। प्रस्ताव के बाद वित्तीय सलाहकार और उसकी टीम मार्केट मॉनटरिंग करती है। यहीं एक ध्यान देने वाली बात जो स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार की विश्वसनीयता, भरोसे, क्षमता और सेवान्मुखता – इन सबकी शुरुआत में ही एक साथ परख कराती है, वह यह कि वित्तीय सलाहकार आपको प्रस्तावित स्कीम, फंड या स्टॉक को कहीं से भी लेने की स्वतंत्रता देता है कि नहीं।

   सबसे जरूरी है कि अपनी आंखें और दिमाग खुला रखकर किसी वित्तीय सलाहकार को नियुक्त करें। थोड़ा कष्ट उठाने से आपको ही बेहतर चुनाव करने में काफी मदद मिल सकती है। अगर पैसा सुरक्षित हाथों में फलता-फूलता है तो आपको ही फायदा होगा। साथ ही वित्तीय सलाहकार के रूप में ही आपको एक दीर्घकालिक भरोसेमंद आर्थिक संबंधी भी मिल सकता है। 

तो, सौतेला व्यवहार न करते हुए सही स्कूल (सलाहकार) में भर्ती कराएं और यकीन मानिए कि आपका ये पैसा भी एक दिन आपका कमाऊ पूत बनकर आपके लिए पैसा लाएगा जैसे कि आप हर महीने सैलरी लाते हैं। है अपना काम तो समझाना, ए दिल रिश्ते तोड़ के जोड़। जुदाई की घडियां लाखों-करोडों, मिलन के लम्हे दो या तीन

 टीम फंड गुरु,

खुद की लुगाई से दूरी कैसी?

तुम समझो ना समझो पर हम तो कह के रहेंगे,
की अपना बना लो हम तुम्हारे ही रहेंगे
अजी इश्क कर लो छुट जाएगी जवानी
तब बुढ़ापे में क्या ब्याह करेंगे?

रत्ती भर भर भी समझो लोगे ना तो लाइफ कसम से बन जानी है अब भी समय है. ये जो शेयर मार्केट है ना! रहस्य का पिटारा नहीं है सिंपल बजिनेस गणित है 

हम इस विधा को सहज बोलचाल भाषा में प्रस्तुत कर हम हिन्दी भाषियो को हमारी जड़ से जोड़ने का भागीरथी प्रयास किया है.

बात यू है की ज्यादा इतिहास, ग्रंथों आदि को साक्ष्य नहीं बल्कि मौजूदा ग्लोबल शेयर मार्केट के इतिहास पर नजर डालो तो इस जटिल वित्तीय दुनिया, जिसमें व्यस्त स्टॉक बाजार और जटिल व्यापार तंत्र शामिल हैं, की एक दिलचस्प इतिहास है जो सदियों पहले से चला आ रहा है।

विश्व प्रथम स्टॉक एक्सचेंज कौन?
इस वित्तीय विकास के केंद्र में प्रथम मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज, एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज है। 1602 में स्थापित, इस ऐतिहासिक संस्था ने आधुनिक स्टॉक बाजारों के लिए रास्ता बनाया, जिसने हमारे निवेश, व्यापार और वित्तीय दुनिया को समझने के तरीकों को आकार दिया। एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज की नींव डच स्वर्ण युग के दौरान रखी गई थी, जब डच गणराज्य एक प्रमुख व्यापारिक शक्ति के रूप में फल-फूल रहा था। इस उत्साही माहौल में, डच ईस्ट इंडिया कंपनी, जिसे वीओसी के नाम से भी जाना जाता है, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरी।

रापचिक बवाल काट डाला डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने डच स्वर्ण युग के दौरान, जब डच गणराज्य व्यापार में धूम मचा रहा था, एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई। इस जोशीले दौर में, डच ईस्ट इंडिया कंपनी, जिसे वीओसी के नाम से भी जाना जाता था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में एक बड़ी ताकत बन गई। अपने बड़े-बड़े व्यापारिक कामों के लिए पैसे जुटाने के लिए, वीओसी ने एक नई तरकीब निकाली - शेयर बेचने की।

किया यूँ की लोगों को समझाया की, अगर तुमने 1000 रुपये लगाकर 10% हिस्सा खरीदा, तो जब कंपनी जब मुनाफा कमाएगी, तुम्हें भी 10% मिलेगा। अगर कंपनी बढ़ती है तो उसकी भी कीमत बढ़ती है, तुम चाहो तो तब अपने 1000 रूपए को 3000 रुपये की बढ़त पर देख सकते हो और या अपना हिस्सा बेचकर मुनाफा कमा सकते हो। हम तो विदेश से समान ला रहे जिसे अछे मुनाफ़े मे बेच ही रहे है तुम हिस्सेदार बनकर अपना पैसा बढ़ा सकते हो और हम अपना बजिनेस.

शेयर मार्केट में भी यही होता है, जहाँ कंपनियाँ अपने व्यापार में पैसे लगाने के लिए लोगों को शेयर बेचती हैं। तो 1602 में, कंपनी ने आम जनता को अपने लाभदायक व्यापार में निवेश करने का मौका दिया, जिससे लोग कंपनी में हिस्सेदारी खरीद और बेच सकते थे। ये पारंपरिक तरीके से अलग था और इससे निवेशक भी मुनाफा कमा सकते थे।

इस सब का इंडिया से कनेक्शन ?
अरे कंपनी डील तो इंडिया से ही करती थी और आईडिया यहां के राजा और महाजनो या सेठों के सम्बन्ध को जानकर आया. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (वीओसी) ने भारत में मसालों के व्यापार में बड़ी भूमिका निभाई। इससे कंपनी को फायदा हुआ और एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज का भी विकास हुआ। वीओसी ने जनता को शेयर जारी किए, जिनमें भारतीय निवेशकों ने भी हिस्सा लिया। मसालों के व्यापार के अच्छे मौके और कंपनी का दबदबा देखकर भारतीय निवेशक भी शेयर खरीदने लगे और एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज पर व्यापार करने लगे।

तो पहली कंपनी जिसने पब्लिक को शेयर बेचे?
डच ईस्ट इंडिया कंपनी थी। 1602 में, इस कंपनी ने पहली बार लोगों को अपने व्यापार के शेयर बेचने शुरू किए। यही वो समय था जब शेयर बाजार की शुरुआत हुई!

 इस प्रकार, भारत के लिए स्टॉक एक्सचेंज केवल एक आधुनिक अवधारणा नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें एक पुरानी और समृद्ध व्यापारिक परंपरा में गहराई से जुड़ी हुई हैं, वहीं अर्थ काम भारत के इस अग्रणी वित्तीय ज्ञान और निवेश को सहज भाषा में पेश करने वाले पोर्टल के रूप में हैं।

  टीम फंड गुरु

Feb 8, 2011

इस गिरावट का आओ मिलकर करें स्वागत


जब भी शेयर बाजार गिरा, लघ्घीमार बडे ताव में आ जाते हैं। हर खबर ऐसे तोडते-मरोडते हैं जैसे खत्म हुआ टूथ-पेस्ट ट्यूब ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम इस दृष्टिकोण को मान लेते है जबकि इनके हर बयान बाद में एक मजाक की तरह ही साबित होते हैं, ये जान लें। दरसल शेयर बाजार बढी भीड कि हर उमस को इस तरह का वेन्टलेशन देता है, जो सामान्य और जरूरी हैं। जाने कब हम इस सच्चाई में खुद को कब ढालेंगें?
कृषि उत्पादन बढ़ने से उत्साहित सरकार ने आज अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 8.6% वृद्धि आंकी है। जो पिछले साल देश की 8% से 0.06% बेहतर है, जिसमें कृषि क्षेत्र कि वृद्धि 5.4 % रहने की संभावना है, जबकि पिछले साल यह मात्र 0.4% थी। निर्माण गतिविधि के लिये 8% वृद्धि की संभावना है जो पिछले साल 7% थी। वहीं आउटसोर्सिंग में हमारा दबदबा बरकार है जिससे सेवा क्षेत्र में 11% बढत कि संभावना  है जो 9.7% थी पिछले साल। वहीं देसी-विदेशी संस्थाओं कि तरफ से खरिददारी बढ रही है। क्या कहें उनको जो चंद रोज के ईजप्ट संघर्ष से एनालिस्टओं कि फर्टलाइज़र सेक्टर कि गिरने कि बात को सच्च मान बैढ रहे हैं, पर ये भोंपू तब बज रहा है जब सरकार इस सेक्टर को नियंत्रण मुक्त करने पर विचार कर रही है।

मांग बढने से सफेद सोने ’कपास’ भी बढत पर हैं और 21 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में सुधारों कि धार देखने को मिल सकती है, जिसमें व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा को 1. 60 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाना शामिल है। उधर कुल 91,240 करोड के तो सरकारी FPO है, जिसमें NTPC और SAIL दोनो ही जल्द आने वाले हैं, जिसके लिये तैयारीयां शुरू हो चुकी हैं।
अरे गोली मारे लघ्घीमारों को, किसी भी गिरावट को ’आपदा है आपदा’ का मंत्र दोहराने लगते हैं। याद है वो 2008 की जबरदस्त गिरावट जिसे वित्तीय दुनिया के अंत की तरह देखा जा रहा था वो बेहद कम अवधि के दौरान ही चोखे रिटर्न के रूप में समाप्त हुई थी. निवेशकों को याद रखना चाहिए कि स्टॉक की कीमतें, ये गिरावट वास्तव में अच्छी खबर है। आओ अस्थिरता का स्वागत करें, शेयरों में या इक्विटी फंड में सिप के माध्यम से निवेश करके।
टीम फंड गुरू,
टीम 72 द फ़ंड हाउस के साथ

Nov 27, 2010

अमा यार सुधर भी जाओ

बाजार तो लंबे वक्‍त से सरविसिंग चाह ही रहा था, बस 2जी स्पेक्ट्रम , कॉमन वेल्थ गेम्स, कोरिया , आयरलैंड संकट और अभी का लेटेस्ट LIC हाउसिंग का किस्सा, इन सारी न्यूजों ने बस  मौका दे दिया। ये करेक्शनस हि बाजार को सही स्तर पर पहुंचा्ते है साथ हि सस्ते में खरीददारी का सुंदर अवसर।

अभी जब मैंने बाजार कि इस गिरावट के मुत्‍तालिक लोगो कि नब्ज टटोली तो, पुन: वही मानसिकता दिखी, पेट्रोल का रेट जिस रात से बढने होते है, उसी की शाम को लंबी लाइन में घंटों इंतजार करके सस्ता पेट्रोल तो लेते हो पर यहॉ, बिदक जाते हो, जबकि बाजार वो भी है बाजार ये भी है। आज का भारत  हमारे बगैर भी विकास  कर सकता है, पर हमारा विकास इसकी रफ्तार से कदम ताल मिलाये बिना नही हो सकता है। तो आज ही आगे बढो नही तो  "अभी बहुत कुछ सामने आनेवाला है"  सोचा करो शांत रहो और जब सस्ता माल खत्म होकर बाजार सुधर जाये, तब तो ठंढे हो हि जाओगे क्योंकि तब तक शेयर महंगे हो चुके होते हैं। इसलिए ये फैसला आप पर ही रहा कि कब खरीदना है।

 और जो आगे बढना चाहते है, पर जानकारी नही की कैसे और कौन से शेयर ले, तो इस गुत्थी को अगले सोमवार से हम अपने सहयोगी 72 THE FUND HOUSE कि टीम के सहयोग से एक नये कालम से सुलझायेंगे जो आपको योजना और यकीन के साथ खरिदना सिखायेगा।

उतार-चढ़ाव बाजार के स्वभाव का हिस्सा है। और जिन्दा चीजों में ही हलचल होती है।

Nov 26, 2010

बीत चुके घटनाक्रम के धरातल पर, आज कि तैयारी करना। दर्जी को पुरानी नाप देकर आज के कपडे सिलवाने जैसा है।

Nov 7, 2010


जिन मामूली से मामूली चीजो की बढती कीमतो को मंहगाई कहा जा रहा हैं, वो 5-5 हजार के जूते खरिदने के कारण आया समाजवाद है। बडा असंतुलित लगता था 30 हजार का मोबाईल रखने वाला 20 रु० कि दाल खाते हुये, अब शान से 80 रु० कि दाल खरिदिये!!

Nov 6, 2010

खर्च करने से लक्ष्मी आती है?

लक्ष्मी पूजन करने के लिए जैसी मान्यतायें हैं उसके हिसाब से पूजा करने पर धन-संपदा आती है पर जैसा विधि विधान प्रचलित हैं उससे तो सीधे तौर पर व्यापारी और पंडित के पास ही रकम जाती है। अब माल जिसके पास होगा मालदार वो होगा या जिसके जेब से माल जा रहा है वो?

स्वार्थ सिद्धि को धर्म के प्याले मे परोस कर समाज को पंगु तो हजारों सालों से किया जा रहा है पर परंपरा की चादर पहना कर मौका पे चौका मरने कि कला दिवाली में पूरे निखार पर रहती है। जनाब, जब हम चांद तो क्या वहॉं पानी तक खोज लायें है तो बाजार की चाल को भी समझे, विञापन के जरिये फैलाये जा रहे दिमागी भ्रम को तोडे, आज के दौर की जरूरत है। पूजा -पाठ से क्या आज तक किसी की गरिबी हटी है ....? हजारों वर्षों तक पुश्त दर पुश्त पूजा अर्चना करने वालों को तो गरिब होने की सवाल ही पैदा नहीं होना चाहिए था ?

दरसल व्यापारी और पंडितो ने दिवाली में समाज को लूटने का ऑफिशियली कॉपी राईट ले रखा है जिसका रेव्नयू कलेक्शन में आज भी जबर्दस्त हैं साल दर साल वृद्धि के साथ। दिपावली में लक्ष्मी अगर किसी के पास आती है तो इन्ही के पास, बनिये का तो धनतेरस के नाम से लोगों को लूटना जग जाहीर है। "टीवी ले जाईये आसान किशतों (उधार) पर" जैसे सलोगन के साथ जबकि धनतेरस या दिवाली के आस पास के दिनों में उधार को वर्जित माना गया है पर हम नियम भूलाकर बाजार और लुभावने विञयापन में आ जाते हैं, सही भी है लक्ष्मीजी का वाहन उल्लू ही तो है और त्यौहारों के नाम पे इनकी मंशा यही बनाने की होती
आपकी जेब में ज्यादा से ज्यादा जेब में छेद करके। पर हमको-आपको बाजार कि इस मानसिकता से मुक्ति पानी होगी।
बोनस के पैसे कि दारु उडा के
नकली मिठाई का ढेरा लगा के
सोचना है क्या , जो होना है वो होगा
चल पडे है बनिये पंडित , जेबो में सेंध लगाने
जाने क्या होगा उमा रे जाने क्या होगा रमा रे


प्रसिद्ध निवेशक वारेन बफेट के मुताबिक बचाया पैसा ही कमाया पैसा है और धन की बरबादी को रोकना अतिआवश्यक हैं, अब मर्जी है आपकी, कि आप किसी और कि ATM मशीन बनना चाहते या खुद का बैंक । पूजा पाठ ,फिजूलखर्जी या जुये से लक्ष्मी खुश नहीं होती है, लक्ष्मी तो ञानी गजपती के पास रहती है मतलब धन सोच समझ कर दिमाग लगाकर ही प्राप्त होता है।

शक्‍ति शुक्ला
वित्तिय सलाहकार
शुरू में वह कीजिए जो आवश्यक है, फिर वह जो संभव है और अचानक आप पाएंगे कि अरे! आप तो वह कर रहे हैं जो असंभव की श्रेणी में आता है।

Nov 4, 2010

एक झूठ हजार सच्चाईयों का नाश कर देता है.

डीमैट खाता क्या है?

 डी-मैट अकाउंट का मतलब डी-मेटेरियलाइज्ड अकाउंट से है जिसमें आपके शेयर इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रहते हैं। जिस तरह कोई व्यक्ति पैसे का लेन देन करने के लिए किसी बैंक में खाता खुलवाता है उसी तरह शेयरों की खरीद बिक्री के लिए डी-मैट खाता खुलवाया जाता है। शेयरों की खरीद फरोख्त के लिए डी-मैट खाता जरुरी है क्योकि डी-मैट के ट्रेडिंग खाते में ही शेयरों की खरीद फरोख्त होती है। खाता होल्डर चाहें तो खुद या उसके बिहॉफ पर कोई शेयर ब्रोकिंग कंपनी शेयरों का कारोबार कर सकती है। डी-मैट खाता खुलवाने पर ट्रेडिंग खाता खुद ब खुद खुल जाता है। 

डी-मैट के फायदे 
  • शेयरों की खरीद बिक्री के लिए लगने वाला ब्रोकरज (दलाली) चार्ज घट जाता है। 
  • खरीद-फरोख्त आसान व जल्दी होती है। 
  • इससे तरलता बढ़ती है
  • इस खाते से हस्ताक्षर में होने वाली गड़बड़ी से भी बचा जा सकता है। 
  • शेयर सर्टिफिकेट के देरी से पहुंचने या खोने के डर नहीं रहता है।
  • साथ ही आप इस खाते से धोखेबाजी, जालसाजी, शेयर के आग लगने, फटने, चोरी होने आदि के जोखिम से बचा जा सकता है। 
  • डारेक्ट शेयर में जहां 0.5 फीसदी स्टांप डयूटि लगती है वहीं यह खाता रखने वाले निवेशक को यह फीस देना नहीं पड़ती है। 
  • शेयरों का विभाजन होने पर उनका आवंटन और शेयरों पर मिलने वाला बोनस भी तुरंत प्राप्त होता है।
  •  शेयरधारक के पता बदलने पर  केवल अपने डीपी को सूचित करना पड़ता है जिससे हर कंपनी (जिसके शेयर ले रखे हैं) को सूचना नहीं देनी पड़ती।कौन खोलता है डी-मैट डी-मैट खाता खुलवाने का हक सिर्फ डिपोज्रिटीज को होता है। 

भारत में मात्र दो डिपोज्रिटी हैं 
  1. नेशनल सेक्योरिटीज डिपोज्रिटी लिमिटेड (एनएसडीएल) एवं 
  2. सेंट्रल डिपोज्रिटी सर्विसेज लिमिलटेड (सीएसडीएल)। 
इन डिपोज्रिटीज के करीब 500 से ज्यादा एजेंट हैं जिन्हें डिपोज्रिटी पार्टिसिपेंट्स (डीपी) कहा जाता है। यह जरूरी नहीं है कि डीपी कोई बैंक ही हो। दूसरी वित्तीय संस्थाएं (जैसे शेयर खान, रिलायंस मनी, इंडिया इनफोलाईन आदि) के पास भी डी-मैट अकाउंट खोला जा सकता है।
यह जानना जरूरी है कि जो व्यक्ति खुद शेयर खरीदते बेचते नहीं हैं उनके ब्रोकर प्रतिनिधि के रूप में खाते का इस्तेमाल कर सकते हैं।

कैसे खुलेगा खाता
डी-मैट खाता खुलवाने के लिए निवेशक के पास 
  1. पैन कार्ड और उसका 18 वर्ष का होना जरूरी है। 
  2. बैंक खाता भी होना जरूरी है। 
डीपी से प्राप्त फॉर्म भरने के साथ खाता खुलवाने वाले को पहचान पत्र व पता का दस्तावेज (वोटर आईडी, पासपोर्ट, राशन कार्ड, ड्राईविंग लाईसेंस, आयकर रिटर्न, बिजली बिल, टेलिफोन बिल आदि) और फोटोग्राफ जमा करना होता है। इन दस्तावेजों को देने के बाद डीपी आपका खाता खोल देता है।

नए खाताधारक को एक बेनिफिशयरी ओनर नंबर (बीओआडी) मिलता है जिसका इस्तेमाल कर शेयरों की खरीद बिक्री की जाती है। दूसर खातों की तरह इस खाते में भी नॉमिनी रखा जाता है। 




कितनी फीस ?
डी-मैट खाता खुलवाने वाले व्यक्ति से डीपी कई तरह के फीस वसूलता है। यह फीस कंपनी दर कंपनी अलग हो सकती है। 
  1. अकाउंट ओपनिंग फीस – खात खुलवाने के लिए वसूला जाने वाला फीस। कुछ कंपनियां (जैसे आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, यूटीआई आदि) यह फीस नहीं लेती है। जबकि कुछ (एसबीआई और कार्वी कंसलटेंट्स आदि) इसे वसूलती हैं। वैसे कुछ कंपनियां इसे रिफंडेबल (खाता बंद कराने पर लौटा देती हैं) भी रखती हैं।
  2. एनुअल मेंटेनेंस फीस – सालाना फीस जिसे फोलियो मेंटेनेंस चार्ज भी कहते हैं। आमतौर पर कंपनी यह फीस साल के शुरुआत में ही ले लेती है।
  3. कसटोडियन फीस – कंपनी इसे हर महीने ले सकती है या फिर एक मुश्त। यह फीस आपके शेयरों की संख्या पर निर्भर करता है।
  4. ट्रांजेक्शन फीस – डीपी चाहे तो इसे हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज कर सकती है या फिर चाहे तो ट्रेडिंग की राशि पर (न्यूनतम फीस तय कर)।
इनके अलावा कंपनी 
  • री-मैट, 
  • डी-मैट, 
  • प्लेज चार्जेज, 
  • फील्ड इंस्ट्रक्शन चार्जेज आदि भी वसूल सकती हैं।

Oct 28, 2010

Kotak FMP 6M Series 10


INVESTMENT OBJECTIVE  
  The investment objective of the Scheme is to generate returns through investments in debt and money market instruments with a view to significantly reduce the interest rate risk.
      
  SCHEME TYPE  Close ended debt scheme
 
  MINIMUM INVESTMENT DURING NFO Rs. 5,000/-


OPTIONS Growth and Dividend Payout.

 
 
LISTING 
The units of the scheme will be listed on NSE on allotment.
BENCHMARK  
  CRISIL Short Term Bond Fund Index  
     
  LIQUIDITY  
  Units of this scheme will be listed on National Stock Exchange. Investors may sell their units in the stock exchange(s) on which these units are listed on all the trading days of the stock exchange. The units cannot be redeemed with KMMF until the maturity of the scheme.
     
  MATURITY  
  180 days after the date of allotment of units.  
     
  COLLECTION CENTRE  
  Purchases/Switch: At KMAMC Authorized Collection Centers, CAMS Investor Service Centers & CAMS Transaction Points indicated on the back cover of the SID. Kindly ensure that the switch request is accompanied with the investment application form of Kotak FMP 6M Series 10.
     
  For any investment related queries, please call on - 09238974581. or write to us at jiprashu@gmail.com
 
 

Shakti Shukla Investment Advisor

Unitech launches Fixed Deposit

With over 3 years of real estate and infrastructure developement experience, Unitech is one of the leading real estate developers.  It has market capitilisation of  approx 10,000 crores and land reserves of over 11000 acres spread across major centers of economic activity of India.

Unitech Ltd has launched fixed deposit scheme to accumulate funds directly from public.  The offered interest rates are much better than current offerings by bank FDs.

 FIXED DEPOSIT SCHEMES

Scheme (A) - Non Cumulative*
1 year - 11.00%  P.A.   ------ Rs. 25,000
2 Years - 11.50% P.A.  ------ Rs. 25,000
3Years - 12.00%  P.A.   ------ Rs. 25,000
*INTEREST WOULD BE PAID ON QUARTERLY BASIS
*ADDITIONAL AMOUNT IN MULTIPELES OF Rs. 1000/-

Scheme (B) - Cumulative**
6 MONTHS - 11.00% P.A.     ------ Rs. 25,000
1 Years - 11.00%                 ------ Rs. 10,000
2Years - 11.50%                  ------ Rs. 10,000
3Years - 12.00%                  ------ Rs. 10,000
**Interest compounded monthly on deposits of one year or more and payable on maturity
**Additional amounts in multiples of Rs. 1,000/-

DEPOSIT HIGHLIGHTS
  1. Only Rs. 10,000 as minimum deposit amount.
  2. Additional amount to be in the multiples of Rs. 1,000 only.
  3. Nomination facility available.
  4. Payment of interest would take place through NEFT facility
  5. Payment of Principal/Interest would take place through NEFT facility from designated
    IDBI Bank. Account payable cheques will be issued incase of absence of Bank details
    of Investors or non-availability of NEFT facility.
  6. Premature refund allowed as per Companies (Acceptance of Deposits) Rules 1975.
  7. Interest to be calculated monthly on deposits of 1 year and more in Scheme B.
  8. Interest to be calculated from the date of encashment of Cheque/Demand Draft by Unitech Ltd.
MANAGERS TO THE FIXED DEPOSIT
  • M/S. BAJAJ CAPITAL LTD.
  • M/S. R.R. INVESTORS CAPITAL SERVICES LTD.
  • M/S. JM FINANCIAL SERVICES (P) LTD.
  • M/S. KARVY STOCK BROKING LTD.
  • M/S. SMC GLOBAL SECURITIES LTD.
  • M/S. BHARAT BHUSHAN & CO.
Please note that copy of ID PROOF & ADDRESS PROOF IS COMPULSORY with the application.
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    Oct 26, 2010

    लोगों को उनकी चाहतों को पूरा करने में मदद  करके तो देखिये,आपका ऑंगन दुगुना हो जायेगा ।

    Oct 25, 2010

    विचारो के मामले में चूजी ही रहें। अरे यही तो आपके भाग्य के निर्माता है. जो आपके कैरियर, दोस्त, रहन सहन के तौर तरीके को तय करते है और ये बात आपके निवेश के ढंग पर भी लागू होती है।

    समृध्द कैसे बने ?

    कुछ भी शुरु करने से पहले मेरी एक बात गांठ बांध लें

     बाजार में कभी कोई भी संकट नहीं होता है। वो तब भी था जब आपके दादाजी अनाज के बदले सामान लाते थे, आज भी जब रुपये से समान खरिदते हैं और तब भी जब आपके बच्चे स्वाइपिंग के जरिये समान खरिदेगें !

    अगर इस बात पर आपको विश्‍वास नही है, तो यकिकन आप नेट पर कुछ और ही खुराफत करे HNI (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) बनना आपके बूते का नहीं है क्योकि यहॉ पर आप जो कुछ भी पढेंगे वो नेट पर फालतू टाईम खराब करने वालो के लिये नही है। और हमने कभी भी किसी निवेशक का सिर झुकने नहीं दिया है भले ही उसने हमें शुक्रिया किया या नही। आप तगडे फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश कर बाजार को मात दे सकते हैं। शर्त बस इतनी है कि निवेश होना चाहिए, की-बोर्ड का शॉर्ट कट नहीं।

    दोस्तों,
    हम आप में से कई रिडर्स के जीवन के संघर्ष को जानते है जो धोखे, लालच और संग दिली का शिकार हुये है या किया , जिसका मूल  रुपया-पैसा ही था, सोचते थे कि बगैर दुसरे को लूटे वो अमीर नही बन सकते हैं पर बाद में इन थके-बीमार प्राणी्यों को बात समझ आई कि भले ही अपने जीवन को सुधारने के लिये कुछ नहीं कर सकते हैं, तब पर भी इसे मूल्यवान बनाने के लिए कुछ अवश्य ही कर सकते हैं

    तो जाने सुरक्षित रुप से समृध्द होने का रास्ता ताकि अगले कुछ वर्षों बाद फिर कभी भी पैसे के बारे में चिंता करने की ज़रूरत ही ना पडे। वैसे, यह आप पर निर्भर करता है कि आप इससे क्या अर्थ निकालते हैं। हम शुरू करते हैं
     
    सुरक्षित तरीका निवेश करने का और अमीर बनने का
    सबसे बड़ा निवेशक वारेन बफेट की तरह 

    फंडामेंटल रिसर्च के आधार पर आप एक बेहतरीन कंपनी के शेयरस खरीदें और एक दिन इसका मूल्य आपके खरिदे दाम से 20% गिर जाता है। उस समय क्या करेंगें आप? अभी के लिये बस इतना ही शेष अगले भाग में...
    हम मात्र जरुरते हि नही ख्वाहिशों को भी पूरा करते हैं।

    Oct 23, 2010

    करना तो पडेगा, मात्र ये नही सही है, वो नही सही है कहने से तो चीजें सही होने से रही।

    Oct 20, 2010

    मार्केट का रवैया जैसा आज देखने को मिला है, ये पुन: 19हजार से 20हजार का दोहराव है, आपको घबराने कि जरुरत नही है। खबर फैलाई जा रही है ये चीन का ब्याज दर बढाने का असर है, अब अगर ये सही है तो खबर का असर सुबह ही हो जाना चाहिये था पर गिरावट आखिरी में शुरु हुई । बाकी बाद में
    नमस्कार
    सफलता पाने के लिये आपमें जोश और काम मे निपुणता कि दरकार होती है और ये सब मिलता है आपकी नेक नियत या ईमानदारी कि कीमत पर बाकि सब तो झोला छाप होता है

    Oct 17, 2010

    विश्वास तो केवल चरित्रवान व्यक्तियों पर ही किया जाता है बाकि बुद्धिमान की तो प्रंशसा, धनवानो से ईर्ष्या, और बलशाली से डरा ही जा सकता है।

    Oct 2, 2010

    रोक सको तो रोक लो

    महाराष्ट्र के आदिवासी गांव थेंभली के 10 बाशिंदों को  12 अंको वाले  कार्ड प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हाथों में  सौंपते हुये आधार कार्ड परियोजना की शुरुआत कि। आधार कार्ड जिसका पहले नाम विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईडी) था, से देश ने नये युग कि शुरुआत का बिगुल फूंक दिया है।

    इस आधार कार्ड से देश के हर नागरिक को 12 अंकों की विशिष्ट संख्या दी जाएगी जो उसकी उंगलियों के निशान से लेकर आंखों की पुतलियों की बुनावट तक का ब्योरा रखनेवाले केंद्रीय डाटाबैंक से जुडा होगा।
     इस समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल के. शंकरनारायणन, मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया और यूआईडीएआई प्रमुख नंदन नीलेकणी भी मौजूद थे। यूआईडीएआई ने अगस्त 2009 से काम करना शुरू किया था और लक्ष्य था कि 12 से 18 महीनों के भीतर पहला नंबर दे दिया जाएगा। जाहिर है कि उसने अपना यह लक्ष्य दस कार्डों के वितरण के साथ हासिल कर लिया है।
    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विशिष्ट पहचान कार्ड का वितरण आम आदमी के कल्याण के लिए एक बड़े प्रयास की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि गरीबों के पास कोई परिचय-पत्र नहीं होता। इस कमी के चलते वे बैंक खाता नहीं खोल सकते या राशन कार्ड हासिल नहीं कर सकते। वे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकते और कई बार इन लाभों को दूसरे हड़प जाते हैं। देश में जो लोग आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं वे इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी होंगे।

    गौर तलब है कि पिछ्ले कुछ सालों में जो बडे बदलाव देश में हुये है, मसलन रुपये को पहचान मिलना, नये प्ररुप के बीमा का आना, म्युचुअल फंड से चार्जेज का हटना, भारत की तरक्की से फिर ओबामा और पुतिन का घबराना!, अयोध्या मसले पर फैसला आना ये सब कुल मिला कर ये स्पष्ट करा रहा है हम तरक्की के लिये कमर कस चुके  है।