देश भर के जन जन में ये आस्था गहरे तक जडे जमा चुकी है शेयर बाजार को आम लोग जुए का अड्डा या कैसिनो जैसा मानते हैं , और ये लोग गलत भी नहीं है क्योंकि ज्यादा सौदों में शेयरों से कोई मतलब ही नही होता है बस मूल्य अंतर से प्रोफिट बनता है। पल पल में आप शेयर बाजार से कैसे फायदा कमा सकते हैं?
सही टाईम है, खरीदो, बेचो और स्टॉप लॉस जैसे शब्दॊ का इस्तेमाल करके इस आग में घी का काम टीवी चैनल, बिजनेस अखबार, वेबसाइट सब मिल कर पुरा कर देते हैं "शेयरों या इक्विटी में निवेश को हमेशा लम्बे समय का निवेश करे" जैसे उपदेशो का गाल बजाते हुये । कैसी विडंबना है जोखिम कि बात करते हुये द्स्तावेज को पढ्ने को कहा जाता है, पर ऑफर डाक्यूमेंट मे ऑफर का प्रचार मात्र होता, कंपनी या ऑफर में जोखिम क्या है इसकी तो कोई चर्चा ही नही, ना पटने वाले सिद्धांत और असलियत के इन्ही किनारों के कारण ही आम आदमी कट सा जाता है शेयरों में पैसा लगाने से।

समझे । शेयर वही कंपनी जारी करती है जो कोई न कोई धंधा कर रही होती है। उसके प्रवर्तक जोखिम उठाकर दिन-रात ऐसा काम करते हैं जहां वे 1 रुपए लगाकर 5-10-15 कमाने कि तरकीबें लगातें रहते हैं। दूसरा, कंपनियां तो लाखों लोग बनाते हैं, लेकिन शेयर जारी करके उन्हें स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराने का ‘जोखिम’ कम ही लोग उठा पाते हैं। सूचीबद्ध या लिस्ट कराने का सबसे बड़ा खतरा होता है कि मान लीजिए कोई बाजार से आपकी कंपनी के शेयर भारी मात्रा में खरीदकर उस पर कब्जा कर ले तो आप उसे रोक नहीं सकते। हालांकि इसके लिए नियम-कायदे बने हुए हैं। फिर भी डर तो है ही कि जिस कंपनी को आपने अपनी पूंजी और मेहनत से ख़ड़ा किया, उसे कोई एकबारगी शेयर खरीदकर आपके हाथ से छीन सकता है। इसीलिए कोई सेठ घन्नूलाल या अशरफी मियां करोड़ों कमाने के बावजूद कंपनी बनाकर आम पब्लिक को अपने शेयर नहीं जारी करते।

सीधी-सी बात है कि हमारे-आपके पास मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, उदय कोटक, आनंद महिंदा या कुमार मंगलम बिडला जितनी पूंजी बिना किसी चमत्कार के कभी नहीं आ सकती। ऐसे हजारों उद्यमी हैं जो देश के कोने-कोने में उद्योग-धंधे चला रहे हैं। सरकार ने भी बड़ी-ब़ड़ी कंपनियों के रूप में आधुनिकता के मंदिर खड़े कर रखे हैं। हम नौकरी करने या खेती-बाडी व छोटा-मोटा धंधा करनेवाले लोग इतनी बड़ी कंपनी नहीं खडी कर सकते। लेकिन शेयर बाजार हमें यह मौका जरूर देता है कि हम उनके कौशल व मेहनत से हासिल की गई समृद्धि में हिस्सेदारी कर सकें। यह भी सच है कि कई मानदंड़ों पर खरी उतरनेवाली कंपनियां ही अपने शेयर जारी कर पाती हैं। दूसरे. शेयर जारी करने के बाद उनका घर कांच का हो जाता है, जहां वे कोई चीज छुपा नहीं सकतीं। आप देखना चाहें तो बाजार में लिस्टेड कंपनी की एक-एक रग से वाकिफ हो सकते हैं। हां, इसके बावजूद ठग तो हर जगह होते हैं। अपराधी खत्म हो जाते तो थानों या कोर्ट-कचहरी की जरूरत ही नहीं पड़ती। पूंजी बाजार के लिए भी ऐसे ही दारोगा की भूमिका निभाती है सेबी।

आप खुद को निवेशक मानें, ट्रेडर नहीं। अगर आप बड़ी और स्थापित कंपनियों में निवेश करेंगे तो हर साल बढ़ती उनकी समृद्धि में हिस्सेदार बन सकते हैं। कई साल पहले मेरे पिताजी के मित्र के पास रिलायंस के 300 शेयर थे। तब उनकी बेटी केवल दो साल की थी। उन्होंने कहा था कि ये शेयर उन्होंने अपनी बेटी की शादी के लिए रख छोड़े हैं। मुझे लगता है कि शेयर बाजार में निवेश को लेकर हमारा यही नजरिया रहे तो हम बड़े सुख-चैन से इस माध्यम का जोखिम उठा सकते हैं।
शेयर बाजार में चाल के लिए 30-40 फीसदी सट्टेबाजी यकीनन जरूरी है। लेकिन जो लोग शेयर बाजार को सिर्फ सट्टेबाजी का जरिया ही मानते हैं, उनसे मैं आखिर में सूरदास की इन पंक्तियां के जरिए पूछना चाहता हूं कि आप कामधेनु के रहते हुए भी छेरी के चक्कर में क्यों पड़े हुए हैं …
शक्ति शुक्ला
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