मार्केट लिंक्ड प्रोट्क्ट चाहे वो युलिप हो या म्युच्युल फड या शेयर इनमें रिस्क तो है, ठीक वैसा ही जैसा खुद अपने से अपना इलाज करना या डॉक्टर से इलाज करना में, निवेश स्पेशियलिस्ट भी आपके आस पास ही हैं, तलाशे. याद रखें मार्केट लिंक्ड प्रोट्क्ट में निवेश ना करने से एक अलग ही तरीके का रिस्क है: महंगाई
एक
लाख टके की बात
गांठ बांध लीजिए। मुद्रास्फीति / महंगाई अगर ज्यादा है (जैसे आजकल लगातार 12 फीसदी से ऊपर का आंकडा सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है) तो यह आपकी बचत पर कोई रिटर्न नहीं मिलने देगें। जो छह-सात फीसदी आप कमाने के सपने देखेंगे, उनको जबरदस्त मुद्रास्फीति चूर कर देगी और यही नहीं, यह आपके बचत के लाभ को तो खाएगी ही, उसके साथ बचत का एक हिस्सा भी चट करके आपका असली रिटर्न निगेटिव कर देगी।
इस सीधे से फंडे को एक सरल मिसाल से समझें, कि माना आपने आज 8% की आशा में 100/- रूपए जमा कर दिए। माना आज आटा दस रूपया किलो बिक रहा है। एक साल बाद आपको मिले एक सौ आठ रूपए मिलेंगे। अगर तब तक आटा ग्यारह रूपए किलो हो जाता है, तो आपका रिटर्न नेगेटिव हो गया न, क्योंकि आज सौ रूपए का जितना आटा आप खरीद सकते हैं, उतना एक साल बाद खरीदने के लिए 108 में 2 रूपए और अपनी मूल बचत के खर्च करने पडेंगे। इस तरह 10 से 8% ब्याज पर आपका पैसा बढने के बजाय साल-दर-साल कम होता जाएगा, और आपकी निवेश उम्मीदों की बगिया खिलने से पहले ही मुरझा जाएगी।
बहरहाल, जैसा कि आपने देखा, कि आज निवेश के सभी परम्परागत तरीकों के अलावा आधुनिक तरीके भी बहुतायत में मौजूद हैं। जबकि कुछ सालों पहले तक ऐसा नहीं था। ऐसी सच्ची कहानियां आज भी बहुत लोगों को गप्प लगती हैं, कि विप्रो, इंफोसिस या रिलायंस में शुरूआती दौर में कुछ हजार रूपए निवेश करने वाले आज करोडपति बन गए।
इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि निवेश के लिए एक चेक लिखने से पहले निवेश तरीकों पर ठंडे दिमाग से खूब सोच-विचार लें।
इस सीधे से फंडे को एक सरल मिसाल से समझें, कि माना आपने आज 8% की आशा में 100/- रूपए जमा कर दिए। माना आज आटा दस रूपया किलो बिक रहा है। एक साल बाद आपको मिले एक सौ आठ रूपए मिलेंगे। अगर तब तक आटा ग्यारह रूपए किलो हो जाता है, तो आपका रिटर्न नेगेटिव हो गया न, क्योंकि आज सौ रूपए का जितना आटा आप खरीद सकते हैं, उतना एक साल बाद खरीदने के लिए 108 में 2 रूपए और अपनी मूल बचत के खर्च करने पडेंगे। इस तरह 10 से 8% ब्याज पर आपका पैसा बढने के बजाय साल-दर-साल कम होता जाएगा, और आपकी निवेश उम्मीदों की बगिया खिलने से पहले ही मुरझा जाएगी।
बहरहाल, जैसा कि आपने देखा, कि आज निवेश के सभी परम्परागत तरीकों के अलावा आधुनिक तरीके भी बहुतायत में मौजूद हैं। जबकि कुछ सालों पहले तक ऐसा नहीं था। ऐसी सच्ची कहानियां आज भी बहुत लोगों को गप्प लगती हैं, कि विप्रो, इंफोसिस या रिलायंस में शुरूआती दौर में कुछ हजार रूपए निवेश करने वाले आज करोडपति बन गए।
इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि निवेश के लिए एक चेक लिखने से पहले निवेश तरीकों पर ठंडे दिमाग से खूब सोच-विचार लें।
तब तक के लिए नमस्कार।
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