देश भर मे ये आस्था गहराई तक है कि इक्विटी निवेश को बुजुर्ग लोगों के लिये खासा जोखिम भरा हैं और उनका निवेश कुछेक फ़िक्सड इनकम प्लान तक ही हो. ये एक गलतफ़ैहमी है. इक्विटी निवेश में जोखिम समय के साथ साथ कम होता जाता है. यकिनन यहाँ पर इक्विटी से मेरा मतलब एक बेहतरीन प्रदर्शन वाले म्युच्युल फ़ंड से है ना कि शेयर. म्युच्युल फ़ंड कि तो इतनी नियामक एजेंसियां और इनकी गतिविधियों पर नजर रखने वाली इतनी संस्थाएं है की पारदर्शिता के बारे में सवाल उठाया ही नहीं जा सकता है.
आइये अब गलतफ़ैहमी को जरा समझते है, नवम्बर 2004 में आपने 1 लाख रु० का निवेश किसी बेहतरीन फ़ंड (यहाँ लिया HDFC TOP200 है) में किया और सिस्टेमैटिक विथड्रॉल प्लान द्वारा आप एक हजार रुपये हर महिने ले भी रहे हैं. नवम्बर 2009 को आपके निवेश राशी एक लाख की कीमत रु० 2,77,673 और हर महिने निकाली राशि 61,000 रु, कुल 338673 रु०, मूल धन 1 लाख से घटाने पर कुल 2,38,673 रु० कि प्राप्ति और कुल लाभ 239% औसत 47.73% का सालाना लाभ वहीं नवंबर 2009 को जब मार्केट अभी तक के निचले स्तर पर था कुल 84% कि वापसी , जो कि 16.8% प्रति वर्ष/
ये सारे आँकडे देखा रहे है कि सोच समझ के लंबे समय के इक्विटी में किया गया निवेश जोखिम को नगण्य, और शानदार वापसी का फायदा दिलाता है. जनाब ! जादू की छडी घुमा कर इच्छा तो सिर्फ नानी- नानी कि कहानीयों में ही पूरी होती है असल जिदंगी का सपना पूरा करने के लिए दृढ़प्रतिज्ञ होना जरूरी है .इक 60 साल के वृद्ध के निवेश का कार्यकाल करीब 20 से 30 साल का होता है. और अगर वृद्धों कि बचत में इक्विटी शामिल ना होतो एक और ही तरह का भीषण रिस्क है- महंगाई. ध्यान देने कि बात है कि जवानों कि तरह वृद्धों कि आय में साल दर साल वृद्धि तो होती नहीं है बल्कि वो तो सिर्फ अपनी रिटायरमेंट कि जमा राशि कि फ़िक्सड इनकम पर ही निर्भर करते है और फ़िक्सड इनकम साधन चाहे वो फ़िक्सड डिपॉजिट हो या डेट म्युच्युल फंड या पोस्ट ऑफिस योजना शायद ही महंगाई का 1% या 2% से ज्यादा दे पाते हो. और 4% कि सालाना महंगाई भी 12 साल के अंदर खर्चों को दुगना कर सकती है. तो करीब से सारी पडताल के बाद जो बात सामने आती हैं वो है कि 7 से 10 साल के सिवा कोई अन्य बचत साधन नहीं है जोकि वृद्धों को साल दर साल गरीब होने के जोखिम से बचा सके. मैं ये नही कह रहा हूँ कि वृद्धों को अपने निवेश को पूरी तरह से इक्विटी में लगाये, बल्कि एक सही दिशा के साथ अगले 7 से 10 साल असल खर्चों को जानने कि कोशिश और आंकलन करते हुये फिक्सड इनकम प्लान मे लगाये और अब ये बाकि बची राशि को दीर्घावधि इक्विटी निवेश मे दे . और इस निवेश को दो या तीन हिस्से करके बैलेंसड फंड में देना बेहतर रहेगा. याद रखे कि लंबे समय(यहॉं लंबे समय से मतलब 5 साल या उससे आगे का कोई भी समय ) का सही इक्विटी निवेश कमतर रिस्क पेश का ही उपहार देता तो क्या इसका लाभ ना लेने कोई कारण बनता है?
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