Aug 25, 2010

मुझे मस्त महौल में जीने दे


बाजार अब धराशाई हो जाएगा !!! ये राय मार्केट के सो-कॉल्ड एक्सपर्टो कि है, उन्हें लगता है कि बाजार अपने पिचले चरम बिन्दु तक जाने के लिए संघर्ष कर रहा है। गुरुओ ! मई 2009 भूल गये, जब टीवी, पेपर, वेब सब जगह गला फाड फाड कर कह रहे थे कि 5 साल से पहले तक मंदी पीछा नही छोडेगी वही मार्केट ने आपके मुह पर करारा तमाचा मारते हुये जतला दिया था कि वो अपने दम पर चलती है ’टिप्स’ या एनालिस्टों के कहने पर नही। NSE 5600 से गिर 5400 पर पहुंच सकता है पर इसे करेक्शन कहते है और बाजार में ऐसा होता ही रहता है। वरना प्रोफिट कैसे होगा? साथ ही साथ अमेरिकी बैंकों के बारे जब तक कोई बुरी खबर नहीं आती, तब तक लगता नहीं है कि बाजार को लेकर नकारात्मक होने की कोई वजह बनती है


एक्सपर्टो आपके के कारण ही लोग शेयर बजार को जुआ घर समझते है।टीवी पर सुबह आठ से चार बजे तक सट्टे कि तालीम देना बंद करे और हो सके तो शर्म करो। आप भी ध्यान रखे आज ही बनिया और कल सेठ कोई नही हुआ है।

प्यारे दोस्तों, सही कंपनी, ठीक समय, रियल टारगेट इस मूलमंत्र के साथ चले मार्केट कभी निराश नही करेगी। ठीक समय मतलब जब मार्केट अफरा तफरी में हो, तो अच्छी-खासी कंपनी भी कम रेट पर मिल जाती है, खरिद लें। जी हॉं खरीद लें, अरे! मॉल या मार्केट घूम घूमकर क्या ढूढते हो ? सस्ता माल !! तो मिल तो रहा है..प्रॉफिट बनाने का उसूल है , सस्ते में खरीदो- महंगे में बेचो। सही कहा ना! बिजनेस मैन दोस्तों

लालच बुरी बला, जब सेंसेक्स 20 हजार था तो शानदार रिट्रन होने के बावजूद कई ’समझदारों’ ने इन एक्सपर्टो (जिनका असल काम खुद को टीवी पर दिखाना है, ना कि सलाह) कि सलाह पर मार्केट के 21 या इससे ऊपर पहुचने पर प्रॉफिट बुक करने कि ठानी थी, पर हुआ क्या? दिल के अरमा ऑसूयों में बह गये। फिर कह रहा हू मार्केट के मामले में न तो कयास लगाये न इन पर ध्यान दें। तब क्या करे?

भई! सुनिश्चित कर लें कि मुझे अपने निवेश से 80%. 120% या ये रिट्र्न (रियल) चाहिये और एचीव होने पर निकल लें येही है टारगेट सेट करने का मतलब!

तो मंदी की परवाह करने की जरूरत नहीं है। चाहे गिरावट हो या तेजी आपका फायदा होगा बस आपका वहॉ होना जरुरी है।

जब साल भर का बच्चा आपको गिलास भर पानी नही दे सकता है, तो इस तरह कि उम्मीदें अपने कम उम्र के फंड या स्टॉक निवेश से आप कैसे करते है?

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