सेंसेक्स ने बीते शुक्रवार जैसे ही 228 कि गिरावट दर्ज कि, वैसे ही रिडर्स कि ताबडतोड मेल आयी हमारे पिछ्ले लेख को लेके जहॉ हमने बाजार कमजोर होने कि बात को सिरे से खारिज करते अभी कुछ ही दिन पहले इसके नई बुलंदीयों पर जाने कि बात थी और ये क्या हो रहा है? तो हम अभी भी अपनी बात पर कयाम है। दोस्तों, खुचरी गिरावट से अगर आप घबरा रहें हैं तो या आप सट्टेबाज है अगर नहीं तो यकिनन आपको ’सुशिक्षित निवेशक’ बनाने के हमारे प्रयास में अभी कुछ कसर रह गयी है। हम अपने इस दायित्व को दुरुस्त करेंगे, पर सतही जानकारी के साथ अफवाहो पर काम करना हमने सिखा ही नही है। तार्किक और फन्डामेन्टल आधार पर हम आपको आश्वत करते है कि ये मात्र अफरातफरी है, संयम रखे । जिनको यकिन है हमारी बात का उनके लिये ये लेख यहीं खत्म होता है। नमस्कार।
जिन रिडरस को डाउट बना है कृपया जारी रहें।
चलिये समझते है ’इण्डिया शाईनिंग’ कि अवधारणा क्या है?
सूरते-हाल
मार्केट को आसमान से बबूल पर लाने कि औकात इस समय ना तो अभी तक नदारद रिटेल इन्वेस्टर में है, ना ही सुस्त रफ्तार से आ रहे HNI और विदेशी संस्थागत निवेशकों में है, एफआईआई ने 57,538 करोड़ रुपये का निवेश भारतीय शेयरों में किया है, जबकि इसके मुकाबले पूरे वर्ष 2009 के लिए यह आंकड़ा 84,278 करोड़ रुपये रहा था। इनकी आमद अभी बाकी है, मेरे दोस्त।
इण्डिया शाईनिंग क्या है?
2009 में केंद्र सरकार आने से जो बढत बाजार ने बनाई वो राजनैतिक स्थिरता, GDP कि ग्रोथ, एक्सपोर्ट वृद्धि रही जिसकी पुष्टि अप्रैल माह में उम्मीद से बेहतर आये रिजल्टस ने की, साथ ही हर सेक्टर मौजूद असीम संभावनायें, मसलन पॉवर सेक्टर कि डिमाण्ड और सप्लाई के बीच इतना गैप है कि तीन दर्जन कंपनीयॉं अगले 20 साल तक तक काम करें तो जाकर ये गैप पूरा हो पायेगा। वहीं इन्फ़्रास्ट्र्कचर क्षेत्र में तो ये गैप इतना है कि डिमाण्ड हर साल करीब दो गुनी हो जाती है, जबकि सप्लाई 15%-20% हो पाती है। यही कारण है कि भारत के कारपोरेट जगत के पास असीम समभावनायें मौजूद है, जो चिल्ला-चिल्ला के हमारी ग्रोथ स्टोथ को प्रमाणित करती है।
अब लाख टके कि बात ये है की आने वाले दिनो में बाजार किस करवट बैढेगा?
न्यूक्लियर डिल कि राहें आसान होने से देश कि सीमेंट, स्टील, आईटी, और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, के शेयर में उछाल आयेगा , वहीं 3जी नीलामी ने भी मजबूती दी है सरकारी खाजाने को और टेलीकॉम सेक्टर, मोबाईल बनानी वाली देशी-विदेशी स्टॉक्स पर उछाल का नया चैप्टर भी खोला, नोकिया की डूयल सिम मोबाईल कि दिसंबर तक देशी कंपनीयों के बराबर कीमत पर सेट कि पेशकश इसका सबूत है।
बजार पर सरकारी असर
कैबिनेट की संशोधित टैक्स सुधार कोड कि सिफारिशों का अधिकांश वर्गो द्वारा स्वागत हुआ है, अब देखना है कि कैपिटल गेन्स के बारे संसद का रुख क्या होगा? बीमा का प्रस्तावित 5 साल का लॉक-इन जहॉं इन कंपनीयो पर तरलता दबाव कम करेगा जिससे पक्के तौर पर सीआरआर में कमी आयेगी, वहीं लॉक-इन इनके पैसे कि वृद्धि सुनिश्चित और उनके विश्वास को मजबूत करेगा। अभी तक मिल रही खबरों कि माने तो, लॉंग-टर्म कैपिटल गेन्स निवेशक लिहाज से सकारात्मक रहा। ये लंबा असर दिखायेगा रिटेल निवेशकों कि बाजार में सीधी वापसी को जो म्युच्युल फंड, यूलिप और शेयर को इक ही तराजू में तौलते आये है। वहीं अमेरिकी जीडीपी आंकड़ों के उम्मीद से अधिक अच्छा रहने की खबर खुशहाली लायेगी।
ध्यान दें
मुख्य रिवर्सल बार (केआर) से ऐसे संकेत मिलते हैं कि अब हमें उतार चढ़ाव में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। और ये आम बात क्योकि लक्ष्य तक पहुचनें के लिये शेर कदम वापस करते हुये, हि आगे कूदता हैं।
चलते-चलते
बाजार फिर मौका दे रहा है सस्ते में खरीद करने की
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